बिना सरकारी बहियों के ही बांट दिए सैकड़ों अवैध पट्टे, एसीबी जांच की उठी मांग

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बिना सरकारी बहियों के ही बांट दिए सैकड़ों अवैध पट्टे, एसीबी जांच की उठी मांग



बिना रिकॉर्ड और बिना सरकारी नंबर के धड़ल्ले से जारी हुए आबादी, गौचर और मंदिर भूमि के पट्टे



जांच में बड़ा खुलासा: पंचायत समिति परबतसर ने पिछले 5 वर्षों में बडू पंचायत को जारी ही नहीं की कोई पट्टा बुक



राजवीर सिंह मनाना/डीडवाना-कुचामन/ जिले के परबतसर के निकटवर्ती ग्राम बडू में पंचायती राज नियमों को ताक पर रखकर किए गए एक बहुत बड़े पट्टा घोटाले और वित्तीय अनियमितताओं का सनसनीखेज मामला सामने आया है। मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद नागौर के आदेश पर हुई एक उच्च स्तरीय प्रशासनिक जांच में यह साफ हो गया है कि ग्राम पंचायत बडू द्वारा पिछले कुछ वर्षों में जारी किए गए आबादी, गौचर, मंदिर और अन्य सभी श्रेणियों के पट्टे पूरी तरह से फर्जी, अवैध और गैर-कानूनी हैं। इस बड़े खुलासे के बाद स्थानीय ग्रामीणों में भारी आक्रोश है और पूरे मामले की जांच भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) से करवाने की मांग ने जोर पकड़ लिया है।

बिना सरकारी बही के कैसे छप गए पट्टे
पंचायती राज नियम 1996 के नियम 168 (3) के तहत किसी भी ग्राम पंचायत में पट्टा जारी करने के लिए पंचायत समिति स्तर से ही राजकीय मुद्रित और सीरियल नंबर वाली पट्टा पुस्तिकाएं जारी की जाती हैं। लेकिन जब जांच समिति ने इस मामले की परतों को उखाड़ा, तो पंचायत समिति परबतसर ने लिखित में रिपोर्ट देकर अधिकारियों को चौंका दिया। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 5 सालों में पंचायत समिति परबतसर की ओर से ग्राम पंचायत बडू को एक भी पट्टा पुस्तिका जारी नहीं की गई है। इतना ही नहीं, जब ग्राम पंचायत के खुद के भंडार (स्टॉक) रजिस्टर की जांच की गई, तो वहां भी पट्टा पुस्तिकाओं की खरीद या प्रविष्टि का कोई नामोनिशान नहीं मिला। इसके बावजूद पंचायत में गलत तरीके से पट्टा पुस्तिकाओं का उपयोग कर धड़ल्ले से अवैध पट्टे बांटे जा रहे थे। जांच समिति ने अपने अंतिम निष्कर्ष में स्पष्ट रूप से लिखा है कि इस तरह बिना रिकॉर्ड के जारी किए गए सभी पट्टे पूर्णतः अवैध हैं।

शक्तियों का दुरुपयोग: निलंबित सरपंच का दखल और मानदेय का खेल
जांच के दौरान पूर्व कार्यकारी सरपंच दिनेश पुरोहित ने कमेटी के समक्ष बयान दर्ज करवाकर तत्कालीन प्रशासनिक मिलीभगत पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके कार्यकाल के दौरान निलंबित सरपंच सुरेश माली द्वारा पंचायती कार्यों में लगातार अवैध हस्तक्षेप किया गया और राजकीय मोहरों का दुरुपयोग किया गया। इसमें तत्कालीन विकास अधिकारी कविता जसोरिया की भूमिका पर भी सवाल उठे, जिन्होंने नियमों के विपरीत जाकर निलंबित सरपंच को वित्तीय शक्तियां सौंप दी थीं। इसके साथ ही, कार्यकारी सरपंच के रूप में कार्य करने के बावजूद दिनेश पुरोहित को उनके हक के मानदेय का भुगतान तक नहीं किया गया।

कागजों में चमका गांव, जमीन पर मिले गंदगी के बड़े ढेर
शिकायतकर्ता निर्मल जोशी पारीक सहित अन्य ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि बडू ग्राम पंचायत में पिछले 10 वर्षों से साफ-सफाई के नाम पर लाखों रुपये के बजट की केवल कागजी खानापूर्ति की जा रही है और इसमें भारी वित्तीय गबन हुआ है। जब पूर्व में शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने क्षेत्र का दौरा कर सरपंच को निलंबित किया था, तब कुछ दिनों के लिए ट्रैक्टर लगाकर सफाई का दिखावा किया गया, जो बाद में फिर ठप हो गया। जांच समिति ने जब बडू गांव का मौका मुआयना किया, तो जगह-जगह गंदगी और कचरे के विशाल ढेर पाए गए। रिपोर्ट में साफ कहा गया कि पंचायत प्रशासन स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के प्रति पूरी तरह उदासीन रहा है, जिसके लिए इसके खिलाफ कड़ी दंडात्मक कार्रवाई होनी चाहिए।

क्या है अधिकारियों का पक्ष

वर्तमान ग्राम विकास अधिकारी रामदेव मुवाल ने जांच दल के सामने स्वीकार किया कि पंचायत के रिकॉर्ड में पट्टा पुस्तिकाओं की खरीद या स्टॉक एंट्री का कोई विवरण मौजूद नहीं है। सफाई व्यवस्था को लेकर उन्होंने कहा कि वर्तमान में निविदा प्रक्रिया के तहत एक निजी फर्म (गोदारा कंस्ट्रक्शन) के माध्यम से कार्य शुरू करवाया गया है। साथ ही उन्होंने पूर्व कार्यकारी सरपंच के बकाया मानदेय का भुगतान जल्द से जल्द नियमानुसार करने का भरोसा दिलाया है।

जांच समिति की अंतिम टिप्पणी:
चूंकि ग्राम पंचायत बडू को पंचायत समिति द्वारा कोई पट्टा पुस्तिका जारी नहीं की गई और न ही ग्राम पंचायत के रिकॉर्ड में इसका कोई इंद्राज है।
अतः ग्राम पंचायत बडू द्वारा जारी किए गए आबादी, गौचर, मन्दिर एवं अन्य सभी पट्टे पूर्णतः अवैध हैं। इसके अतिरिक्त मौके पर स्वच्छ भारत मिशन की घोर अवहेलना और भारी गंदगी पाई गई है, जिसके लिए ग्राम पंचायत के विरुद्ध नियमानुसार सख्त से सख्त दंडात्मक कार्यवाही अमल में लाई जानी अत्यंत आवश्यक है।
— अजीत सिंह (विकास अधिकारी, पंचायत समिति नावां)
भागीरथ मल (अतरिक्त विकास अधिकारी, कुचामन सिटी)

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