चुनाव आयुक्त के खिलाफ दिल्ली पुलिस में शिकायत:महुआ ने FIR की मांग की; विपक्ष की 6 महीने में दूसरी बार महाभियोग लाने की तैयारी
TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ दिल्ली के संसद मार्ग थाने में शिकायत दर्ज कराई है। महुआ का आरोप है कि ज्ञानेश ने मतदाता सूची में नियमों के खिलाफ बदलाव किए गए और पात्र मतदाताओं के नाम हटाए गए। ममता ने शिकायत की कॉपी X पर शेयर करते हुए लिखा है कि ज्ञानेश चोर कुमार एक मनमाना काम करने वाले अधिकारी हैं, जिन्होंने बाकी दो चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना काम किया। यह शिकायत ऐसे समय दर्ज की गई है जब चुनाव आयोग के भीतर भी ECINET/मतदाता सूची के डिजिटल सिस्टम और Form-6 में बदलाव को लेकर दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों की रिपोर्ट सामने आई है। इधर, कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्ष 6 महीने में दूसरी बार चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग लाने की तैयारी में है। इससे पहले अप्रैल में महाभियोग प्रस्ताव लाया गया था, लेकिन लोकसभा में खारिज हो गया था। शिकायत में महुआ के आरोप विपक्ष अगले सत्र में महाभियोग लाने की तैयारी में विपक्ष एक बार फिर ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने की योजना बना रहा है। इससे पहले अप्रैल में भी विपक्ष ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग नोटिस दिया था लेकिन लोकसभा में वह प्रस्ताव खारिज हो गया था, जबकि राज्यसभा में अभी भी लंबित है। सूत्रों के मुताबिक, इस बार भी महाभियोग प्रस्ताव को कांग्रेस ही लीड कर रही है। कांग्रेस ने इस मुद्दे पर विपक्षी दलों से बात की है। संभावना है कि इसे अगले 2 हफ्तों के भीतर पेश किया जाएगा। एक और मामला सुप्रीम कोर्ट भी पहुंचा है, जहां एक वकील ने भारत के अटॉर्नी जनरल को पत्र लिखकर ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अवमानना कार्रवाई चलाने की मांग की है। 25 सितंबर राज्यों में विरोध प्रदर्शन करेगी कांग्रेस कांग्रेस ने अपनी स्टेट यूनिट्स को निर्देश दिया है कि वे 25 सितंबर को अपने-अपने राज्य चुनाव आयोग कार्यालयों तक विरोध मार्च निकालें। इस दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी और उन्हें पद से हटाने की मांग की जाए। प्रदर्शन के दूसरे चरण में, सभी जिला कांग्रेस कमेटी 28 सितंबर को अपने-अपने जिला कलेक्टर कार्यालयों तक इसी तरह के विरोध मार्च निकालेंगी। एक मीडिया रिपोर्ट के बाद शुरू हुआ ज्ञानेश कुमार पर विवाद इस पूरे मामले की शुरुआत इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट से हुई थी, जिसमें SIR को लेकर चुनाव आयोग के अधिकारियों के बीच मतभेदों का जिक्र था। रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने चुनाव पैनल के भीतर SIR प्रक्रिया को लेकर बार-बार चिंता जताई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, SIR प्रक्रिया की देखरेख तीनों अधिकारियों ने की है, लेकिन संधू और जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार औपचारिक रूप से आपत्तियां दर्ज कराईं। इनमें से 4 आपत्तियां एक ही दिन में दर्ज की गईं। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि ये आपत्तियां उन फैसलों और आदेशों को लेकर थीं, जिन्हें संधू और जोशी की जानकारी के बिना जारी किया गया था। ज्ञानेश कुमार को मिली इम्युनिटी कार्यकाल के फैसलों पर पुलिस एक्शन नहीं हो सकता: ज्ञानेश कुमार को मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023′ की धारा 16 के तहत सुरक्षा मिली है। यानी, धारा 16 उन्हें सुरक्षा देती है कि “अपने आधिकारिक कर्तव्यों के निर्वहन में किए गए किसी भी कार्य या निर्णय” के लिए उनके खिलाफ कोई दीवानी या आपराधिक मुकदमा नहीं चलाया जा सकता। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, जब तक यह प्रावधान मौजूद है, उन्हें केवल पुलिस कार्रवाई या गिरफ्तारी के जरिए हटाना, उन पर केस चलाना कानूनी रूप से बहुत चुनौतीपूर्ण है।
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