दिल्ली PG हादसा- किरण बेदी की हाईकोर्ट में याचिका:पूर्व IPS ने खुद जांच करने की इजाजत मांगी, सरकार ने विरोध किया
पुडुचेरी की पूर्व उपराज्यपाल और रिटायर्ड IPS किरण बेदी ने गुरुवार को दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। इसमें उन्होंने खुद को दिल्ली पीजी हादसे में पक्षकार (पार्टी) बनाए जाने की मांग की। उनकी मांग है कि वह असुरक्षित और अवैध पीजी हॉस्टलों से जुड़ी जरूरी जानकारी कोर्ट के सामने रखना चाहती हैं। इधर, केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और दिल्ली MCD ने बेदी की याचिका का विरोध किया है। सरकार का पक्ष रखते हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की बेंच से कहा कि किरण बेदी का बहुत सम्मान है, लेकिन याचिका से लगता है कि वह मामले में पहले ही निष्कर्ष निकाल रही हैं। मामले की जांच कर रहे अधिकारियों ने फिलहाल अपनी स्टेटस रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल नहीं की है। सत्य निकेतन का मलबा हटने के बाद की 2 तस्वीरें… बेदी की याचिका पर जवाब के लिए 3 दिन मिले कोर्ट ने कहा कि बेदी मामले में कोर्ट की मदद करना चाहती हैं। उनके लंबे प्रशासनिक अनुभव का इस्तेमाल किया जा सकता है। कोर्ट ने अधिकारियों से मामले को टकराव के रूप में न देखने को कहा। अदालत ने बेदी की याचिका पर जवाब देने के लिए अधिकारियों को 3 दिन का समय दिया। मामले की अगली सुनवाई 25 सितंबर को होगी। सत्य निकेतन में दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस के पास लड़कों के लिए 5 मंजिला पेइंग-गेस्ट हॉस्टल था। 6 सितंबर को मरम्मत के दौरान यह इमारत गिर गई थी। मलबे में दबने से 7 लोगों की मौत हुई थी। कई घायल भी हुए थे। 7 सितंबर को कहा था- सरकार जिम्मेदारी से बच नहीं सकती हाईकोर्ट ने 7 सितंबर को घटना की उच्चस्तरीय MCD जांच का आदेश दिया था। कोर्ट ने साफ कहा था कि सरकार अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकती। कोर्ट ने कहा था कि यह घटना सिर्फ दुर्भाग्यपूर्ण नहीं है। इससे हॉस्टल समेत छात्रों के लिए पर्याप्त आवास सुविधाओं पर गंभीर चिंता पैदा हुई है। अदालत ने दिल्ली यूनिवर्सिटी और सरकार की ओर से चलाए जा रहे हॉस्टलों की स्थिति पर भी चिंता जताई थी। इसके अलावा, छात्रों की सुरक्षा और पेइंग-गेस्ट सुविधाओं को नियंत्रित करने के लिए MCD और अन्य अधिकारियों के अपर्याप्त कदमों पर सवाल उठाए थे। गिरफ्तार आरोपियों में PG मालिक, संचालक और लेबर कॉन्ट्रैक्टर दिल्ली पुलिस ने PG हादसे में बिल्डिंग मालिक हरिराम बंसल, उनकी पत्नी उर्मिला, बेटे महेश, लेबर कॉन्ट्रैक्टर सनोज और सुधांशु नाम के शख्स को गिरफ्तार किया है। ठेकेदार बोला- हादसे से 10 दिन पहले रेनोवेशन के लिए लगाया था पूछताछ में ठेकेदार सनोज ने बताया कि महेश गुप्ता ने उसे 10 दिन पहले रेनोवेशन के लिए लगाया था। उसे 2800 रुपये रोज मिलते थे। काम बेसमेंट को ग्राउंड फ्लोर के बराबर लेवल करने का था, जिसके लिए बेसमेंट में करीब 3 ट्रक मलबा भरा गया था। ग्राउंड फ्लोर पर दुकान की जगह में एक दीवार रुकावट बन रही थी। हादसे वाले दिन जगह बनाने के लिए उस दीवार को हटा दिया गया। दीवार हटते ही कमजोर इमारत लोड नहीं झेल पाई और ढह गई। ——————– दिल्ली PG हादसे से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… परिवार ने बेटे की आंखें दान कीं: पिता बोले- काश बेटे को हॉस्टल से निकाल पाता एक कमरे का रेंट ₹15 हजार, एग्रीमेंट में सुरक्षा से पल्ला झाड़ने की शर्त: 3 महीने की सिक्योरिटी मनी भी ली दिल्ली हाईकोर्ट बोला- हादसे के लिए नगर निगम जिम्मेदार: सरकार भी जवाबदेही से नहीं बच सकती छात्र बोले- 10 मिनट पहले निकले, नहीं तो दबे होते: बिल्डिंग की दीवारों से दरकने की आवाजें आ रही थीं
